Saturday, June 5, 2021

वर्तनी

 

                  वर्तनी

भारत एक अलग-अलग प्रांतीय देश है। विविध प्रांतों के लोग रहते हैं, जहाँ अलग-अलग प्रकार की भाषाओं और बोलियों का प्रयोग किया जाता है, जिसका उच्चारण भी क्षेत्रीयता के प्रभाव के कारण अलग-अलग होता है। इससे बचने के लिए उच्चारण में सावधानी बरतना आवश्यक है। वर्तनी की सामान्य अशुधियाँ और उसका निराकरण।

 

1. स्वर की अशुधियाँ

अशुद्ध

शुद्ध

पुज्य
नोकरी
परिक्षा
मिग्र
अधीन
अगामी
हानी
ओरत
रिण
अहार
क्षत्रीय
मधू
पत्नि
बरात
ऐकता
रितु
देहिक

पूज्य
नौकरी
परीक्षा
मृग
आधीन
आगामी
हानि
औरत
ऋण
आहार
क्षत्रिय
मधु
पत्नी
बारात
एकता
ऋतु
दैहिक

2. अनुस्वार और अनुनासिक की अशुधियाँ

अशुद्ध

शुद्ध

गुंगा
सँवरना
हंसना
वहा
चांदी
अँधा
दांत
गंवार
कँचन
अंधेरा

गूँगा
सँवारना
हँसना
वहाँ
चाँदी
अंधा
दाँत
गँवार
कंचन
अँधेरा

3. विसर्ग की अशुधियाँ

अशुद्ध

शुद्ध

अंत
अत:एव
दुख
प्रायः
प्रात काल

अतः
अतएव
दुःख
प्रायः
प्रातःकाल

4. व्यंजन की अशुधियाँ

अशुद्ध

शुद्ध

ब्राम्हण
प्रमात्मा
कवियित्री
उपलक्ष
उदेश्य
स्वाथ्य
चिन्ह
कृप्या

ब्राह्मण
परमात्मा
कवयित्री
उपलक्ष्य
उद्देश्य
स्वास्थ्य
चिह्न
कृपया

5. , , इ की अशुधियाँ

अशुद्ध

शुद्ध

करन
पुन्य
स्मरन
फण
प्रान
नारायन

करण
पुण्य
स्मरण
फन
प्राण
नारायण

 

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